दुबलापन भगाने और सौन्दर्य बचाने के 21 घरेलु उपाय

मोटापे की तरह दुबलापन भी एक समस्या है । हालाँकि दुबलेपन की समस्या उतनी बड़ी नहीं है जितनी कि मोटापे की । मोटे लोगों की तुलना में दुबले लोग प्रायः कम ही बीमार पड़ते हैं और उनके ज़्यादा दिनों तक जिन्दा रहने की भी संभावना रहती है । 


          

                                       Photo by Masha Raymers from Pexels



                                  दुबलापन भगाने और  सौन्दर्य बचाने के 21 घरेलु उपाय 


मोटापे की तरह दुबलापन भी एक समस्या है । हालाँकि दुबलेपन की समस्या उतनी बड़ी नहीं है जितनी कि मोटापे की । मोटे लोगों की तुलना में दुबले लोग प्रायः कम ही बीमार पड़ते हैं और उनके ज़्यादा दिनों तक जिन्दा रहने की भी संभावना रहती है । 

        फिर भी , अगर देहहड्डियों का कंकाल सा नज़र आए तो समझिए कि कुछ मांसलता लाने की ज़रूरत है । ठीक अनुपात में मांसल शरीर स्वास्थ्य व सौन्दर्य की दृष्टि से उचित है । आहार - विहार में उचित सुधार करके देह का दुबलापन दूर किया जा सकता है । 
           
          कुछ लोग वंशगत प्रभाव से दुबले - पतले होते हैं । उनके शरीर की आंतरिक संरचना कुछ ऐसी होती है कि वे कितना भी पौष्टिक खाए - पिएं पर शरीर में चर्बी इकट्ठा ही नहीं हो पाती और चाहकर भी वे मांसल नहीं दिखते । ऐसे लोगों का दुबलापन दूर होना थोड़ा मुश्किल तो है पर असंभव नहीं है । 

            दुबलापन दूर करने का कार्यक्रम बनाने से पहले यह देख लेना चाहिए कि कहीं किसी रोग की वजह से तो ऐसा नहीं है । यदि कोई रोग हो तो पहले उसे ठीक करने का उपाय करें । ज़्यादा संभव है कि आरोग्य होते ही दुबलापन भी खुद - ब - खुद दूर हो जाएगा । 


      यदि बीमारी ठीक होने के बाद भी दुबलापन बना रहे तो इस अध्याय में दिए उपायों को आजमाकर लाभ उठाएं । 



बिना किसी ख़ास बीमारी के होते हुए भी दुबलापन है तो इसके पीछे - कम भोजन करना या भूखे रहना , पौष्टिकता रहित भोजन करना , देर जागना , कम विश्राम करना या क्षमता से ज्यादा श्रम करना , ज़्यादा उपवास करना , तनाव - चिंता - शोक में जीवन बिताना , पाचनशक्ति कमजोर होना आदि कारण हो सकते हैं । इसका अर्थ यह है कि यदि उक्त कारण ज़िम्मेदार हों तो दुबलापन दूर करने की कोशिश करने के साथ - साथ इन गड़बड़ियों को भी दूर करना चाहिए और ईष्या , द्वेष , चिंता , शोक , क्रोध से मुक्त होकर प्रसन्नचित्त , उमंग भरा जीवन बिताते हुए निम्न उपाय करने चाहिए 


1)  दुबलापन दूर करने की पहली शर्त यह है कि आप अपनी पाचनशक्ति मजबूत करें ताकि खाया - पिया शरीर में अच्छी तरहजच हो और खुलकर भूख लगे । इसके लिए हफ्ते भर विधिपूर्वक उपवास कर सकते हैं । 

2) तरीका यह है कि जब उपवास करना हो तो एक दिन पहले मूंग की खिचड़ी आदि हल्का भोजन लें । रात में दूध या पानी के साथ 2 चम्मच ईसबगोल , एरण्ड तेल अथवा त्रिफला सेवन करके उदर की सफाई करें । 

3) दूसरे दिन रोटी बंद कर दें और मौसमी फलों व बली हरी साग - सब्ज़ियों पर निर्वाह करें । 

4) तीसरे दिन 2-3 घण्टे के अंतराल पर थोड़ा - थोड़ा करके सिर्फ फलों का रस पिएं । 

5)  चौथे दिन सिर्फ पानी पीकर रहें । साथ में नींबू और शहद ले सकते हैं । 

6)  पाँचवें दिन पुनः फलों का रस लें । 

7) छठे दिन फलउबली साग - सब्जी पर रहें । सातवें दिन एक - दो चपाती से शुरू करके धीरे - धीरे खुराक बढ़ाएं ।

8)   इस उपवास काल में दो - तीन दिन एनिमा द्वारा पेट की सफाई कर लें तो बेहतर परिणाम मिलेगा। 

9)  उपवास करने के बाद प्रायः भूख खूब लगने लगती है और खुराक बढ़ जाती है । इस तरहसे बढ़ी हुई खुराक दुबलापन दूर करने में अत्यन्त सहायक है ।  

10)  दुबले लोग सबेरे पौष्टिक नाश्ता लें , पर इसका समय भोजन से 3-4 घण्टा पहले और सोकर उठने के 2-3 घण्टे बाद रखें । 

11) एक पौष्टिक नाश्ता यह है कि थोड़े चनों में गेहूँ , मूंगफली , मूंग मिलाकर अंकुरित कर लें । इस अंकुरित अन्न में नींबू और थोड़ा नमक निचोड़कर नाश्ते के रूप में सेवन कर सकते हैं । नमक , नींबू न मिलाना चाहें तो इसे गुड़ के साथ या इसमें थोड़ी भिगोई किशमिशखजूर मिलाकर भी सेवन कर सकते हैं । ऊपर से चाहे तो थोड़ा दूध पिएं । नमक , नींबू मिलाएं तो दूध न पिएं । इसके अलावा आगे वर्णित खजूर और दूध वाला नाश्ता भी कर सकते हैं या अनुकूल पड़े तो केला - दूध लें । 

12)  जाड़े के दिनों में उड़द का आटा , बबूल का गोंद , देशी घी , अश्वगंध तथा मेवे मिलाकर बनाया गया लड्डू भी पाचनशक्ति के अनुसार सेवन कर सकते हैं । पौष्टिक नाश्ते और भी कई हैं , उन्हें सोच - समझकर सेवन करके लाभ उठाया जा सकता है । 

13)  दोपहर और शाम के भोजन में पर्याप्त पौष्टिक पदार्थों का सेवन खूब चबा - चबाकर करें। 

14)  उपलब्धता के हिसाब से गाजर , पालक , चौलाई , टिण्डा , परवल व विभिन्न हरी सब्जियाँ , मौसमी फल , घी का तड़का लगी दाल , आँवले का मुरब्बा , दूध , घी , मक्खन , चावल की खीर आदि सेवन करें । रोटियाँ गेहूँ की खाएं । चाहें तो गेहूँ में तिहाई भाग चने मिलाकर पिसवा लें और इस आटे की रोटी खाएं । 

15)  भोजन के बाद एक - दो केले और आगरे का पेठा या आँवले का मुरब्बा लें तो अच्छा है । रात के भोजन में एकाध रोटी कम खाएं । 

16)  भोजन के बाद आगे वर्णित अश्वगंधारिष्ट वाला नुस्खा भी सेवन कर सकते हैं । दोनों भोजनों के बीच 8 घण्टे का अंतर रखते हुए मध्यकाल में किसी मौसमी फल या जूस का हल्का पाचक पौष्टिक अल्पाहार ले सकते हैं । 

17)  भोजन के  दो घण्टे बाद पीने की आदत बनाएं । इसके अलावा दिन भर में डेढ़ - दो घण्टे के अंतराल पर 6-8 गिलास तक खूब पानी पीते रहें । 

18)  रात में भोजन से दो - तीन घण्टे बाद और सोने से पूर्व गुनगुने दूध में एक चम्मच घी के साथ मिश्री या दो - तीन चम्मच शहद मिलाकर पिएं । चाहें तो दूध - खजूर वाला आगे लिखा प्रयोग भी कर सकते हैं । सिर्फ इतना ध्यान रखें कि रात में यह नुस्खा सेवन करें तो इसमें खजूर की मात्रा सिर्फ आठ - दस ही रखें सबेरे इसे न सेवन करें । 

19).  इतना उपाय करते हुए सबेरे अपने अनुकूल व्यायाम , योगासन , प्राणायाम अवश्य करें । इस संबंध में किसी पुस्तक या योग्य व्यक्ति से जानकारी प्राप्त की जा सकती है । याद रखें , पौष्टिक आहार के साथ बिना उचित मात्रा में श्रम, व्यायाम किए स्वस्थ सुडौल बनना नामुमकिन है। 

20) उपर्युक्त सुझावों पर अमल करने के बाद दो - तीन माह में आप अपनी सेहत में क्रांतिकारी परिवर्तन देखेंगे । इन उपायों के साथ अपनी प्रकृति को देखते हुए औषधीय प्रयोग के तौर पर निम्न नुस्यों से भी लाभ उठाया जा सकता है .

21)  1 भाग विशुद्ध कासीस भस्म को 16 भाग सुदर्शन चूर्ण के साथ तीन घण्टे तक सूखा मर्दन करके चूर्ण बना लें । इस चूर्ण को 2 ग्राम की मात्रा में प्रातः सायं जल के साथ सेवन करें । फिर भोजनोपरांत 2-2 ग्राम की 3 मात्रा 10-10 मिनट पर सितोपलादि चूर्ण फाँक लें । इसके बाद आधे घण्टे तक पानी न पिएं । इस योग के सेवन से सातवें दिन से ही रक्तवृद्धि होने लगती है । इस कल्प के सेवन से शुक्र की कमज़ोरी , दुबलापन , आलस्य समाप्त होकर रोगी स्वस्थ , सबल और उत्साहपूर्ण हो जाता है । इस योग का प्रयोग जीर्ण - ज्वर , विषम - ज्वर के उपरांत होने वाली दुर्बलता में विशेष लाभप्रद है । 

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