स्वास्थ्य और सौन्दर्य का शत्रु मोटापा भगाने के 27 घरेलु उपाय

मोटापे का अर्थ है- शरीर में चर्बी यानी वसा का ज़्यादा मात्रा में कट्ठा हो जाना । चर्बी भी अजब चीज़ है ।

     

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स्वास्थ्य और सौन्दर्य का शत्रु मोटापा भगाने के 27 घरेलु उपाय 



     मोटापे का अर्थ है- शरीर में चर्बी यानी वसा का ज़्यादा मात्रा में कट्ठा हो जाना । चर्बी भी अजब चीज़ है । अगर संतुलन में हो तो शरीर को सुडौल बनाए रखती है , कम हो तो आदमी बेडौल दिखता है और ज़्यादा हो जाए तो बेडौल ही क्या पूरा शरीर डाँवाँडोल हो जाता है । अर्थात् एक सीमा तक चर्बी ज़रूरी है , इसके बाद गैरज़रूरी । 
     जिनके शरीर में चर्बी संतुलित मात्रा में है , उनके लए तो चिंता की कोई बात नहीं है पर जिनके शरीर में चर्बी की कमी है , वे चीं बढ़ाने के लिए और जिनके शरीर में चर्वी ज्यादा है , वे इसे घटाने के लिए परेशान दिखते हैं । 

      इस अध्याय में हम चर्बी बढ़ने अर्थात् मोटापे की समस्या से नेजात पाने की ही चर्चा करेंगे । मोटापे की समस्या के जैविक कारणों पर तमाम वैज्ञानिक विश्लेषण पलब्ध हैं , पर यहाँ उनकी गंभीर चर्चा बहुत ज़रूरी नहीं दिखती क्योंकि यह ( स्तक जनसामान्य को ध्यान में रखकर लिखी जा रही है। 

मोटापे की समस्या के कुछ मोटे - मोटे पहलू जान लेना तो उपयोगी है ही । 


        दरअसल मोटापे की समस्या मुख्य रूप से दो तरह से पैदा होती है । कुछ लोगों में मोटापा वंशगत प्रभाव से आता हैया शरीर की अन्दरूनी मशीनरी सी होती है कि वे जो कुछ खाते हैं उसका ज़्यादा हिस्सा ची में तब्दील हो जाता यानी एक वर्ग ऐसा है जिनके शरीर में चर्बी जमा करने की ख़ास प्रवृत्ति होती ।

       ऐसे लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति हमेशा चौकन्ना रहने की ज़रूरत होती । मोटापे का दूसरा और सबसे व्यापक कारण है लापरवाही भरी दिनचर्या । 

       जरूरत से ज़्यादा और सारे दिन कुछ न कुछ खाते रहने , आलस्य भरा और ग्महीन जीवन बिताने , भोजन के बाद दिन में सोने , तली - भुनी , वसायुक्त मरीजों का ज़्यादा सेवन करने जैसी आहार - विहार की लापरवाहियों की वजह से यादातर लोग मोटापे के शिकार बनते हैं । 

      एक सवाल यह है कि आखिर किस स्थति को हम मोटापा कहेंगे ? तो इसका सामान्य सा उत्तर यह है कि जब तक रीर की चुस्ती -- फुर्ती कायम है और मन में उत्साह - उमंग बना हुआ है , तब तक मोटापे या दुबलेपन जैसी कोई समस्या नहीं है । 

          यूँ सामान्यतः जितने इंच शरीर की लंबाई हो लगभग उतने ही किलो शरीर का वजन हो तो इसे संतुलित स्थिा मानी जाती है । इसमें उन्नीस - बीस के फर्क से कोई खास अन्तर नहीं पड़ता लेकिन जब फर्क ज़्यादा बढ़ने लगे तो समझिए कि सावधान होने का समय गया है । 

     जिन बुजुर्गों का वज़न , 30-35 वर्ष की उनकी स्वस्थ अवस्था जितः आज भी बना हुआ है , वे अपने को अच्छी स्थिति में मान सकते हैं । 

      मोटापे का आक्रमण सबसे पहले अक्सर पेट , कमर , कूल्हों और जाँघों पर होता है । इसके बाद गर्दन , चेहरा , हाथ - पैर व शरीर के शेष अंग इस गिरफ्त में आते हैं । 

      ध्यान रखने वाली बात है कि शुरूआती दौर में , या जब मोटापा पेट , कमर , कूल्हों और जाँघों तक ही सीमित है तब तक इसे दूर कर ज़्यादा आसान है । लेकिन जब पूरे शरीर पर मोटापा अपना मजबूत कब्जाज लेता है तो इसे हटा पाना तकलीफ़देह और मशक्कत भरा काम हो जाता है। 

          खैर , स्थिति जो भी हो , अगर मोटापे से ग्रस्त लोग अपना स्वास्थ्य और सौन्दर्य वापस लाना चाहते हैं तो उन्हें अविलम्ब संकल्प की मजबूती के सा कमर कसकर कुछ उपायों पर अमल करने की तैयारी कर ही लेनी चाहि अन्यथा भविष्य की देहरी पर मधुमेह , हाई ब्लडप्रेशर , कब्ज , गैस , हृदय रो दमा , गठिया आदि अन्यान्य रोग उनका स्वागत करने को तैयार मिलेंगे , यह जान लें । 

        वैसे मोटापे से त्रस्त लोग इससे निजात पाने के लिए जाने क्या - क करते हैं और कहाँ - कहाँ भटकते हैं , पर ज्यादातर ऐसा ही होता है कि मोटा अन्तिम दम तक साथ नहीं छोड़ता । यह भी गौरतलब है कि मोटापे के इलाज चक्कर में अक्सर लोग ज़्यादा खतरनाक बीमारियों के शिकार बन जाते हैं । 

       सीधी सी बात यह है कि मोटापा दूर करने का कार्यक्रम बहुत सोच - समझक बनाएं और मुस्तैदी से उसका पालन करें । 

       दवाओं का सहारा लेने का इरादा हो इतना याद रखें कि एलोपैथी में मोटापा घटाने की अब तक जो भी दवाएं हैं , निरापद कतई नहीं हैं । इन दवाओं से आप ज़्यादा बड़ी मुसीबत में फंस सकते. 

        प्राकृतिक चिकित्सा से अच्छे परिणाम मिल सकते हैं । आयुर्वेद तमाम नुस्खे निरापद और कारगर हो सकते हैं , पर इनमें भी हर किसी नुस्खे सिर्फ जड़ी - बूटियों के नाम पर ही आँख मूंदकर नहीं आजमाया जा सकत पथ्य - अपथ्य का ध्यान रखते हुए होम्योपैथी और बायोकैमी दवाओं से वज़ घटाना पूरी तरह सुरक्षित माना जा सकता है । 

        कई लोग सोच सकते हैं कि स्वदे पोन्नति चिकित्सा की बात करते - करते होम्योपैथी का ज़िक्र कैसे ? तो यहाँ अति संक्षेप में यह बता देना उचित है कि होम्योपैथी के सिद्धांत और आयुर्वेद की मूल मान्यताओं में कहीं कोई विरोधाभास नहीं है , बल्कि कई मायनों में होम्योपैथी कहीं ज़्यादा आयुर्वेदिक पद्धति है । 

        यह रहस्य वे लोग आसानी से समझ सकते हैं जिन्हें होम्योपैथी के सैद्धांतिक पक्ष की गहरी समझ है । 

        यह भी आश्चर्यजनक बात है कि जर्मनी में खोजी गई यह पद्धति भारतीय समाज और सांस्कृतिक मूल्यों के सर्वथा अनुकूल है । ऐसी पद्धति की खोज संभवतः इसलिए भी आसान हुई , क्योंकि इसके आविष्कर्ता महात्मा हनीमेन का जीवन भारतीय ऋषियों - महात्माओं जैसा अध्यात्म प्रेरित नैतिकतावादी रहा । 

         बहरहाल , मोटापा घटाने के लिए आप कुछ भी करें , अंततः आहार - विहार संयमित करने से ही बेहतर परिणाम मिल सकते हैं । इसमें से पहले आहार की बात की जाए तो इसका सीधा सा अर्थ यह है कि आपकी अपना खान - पान ऐसा संयोजित करना होगा कि शरीर को बाहर से वसा और ऊर्जामान ( कैलोरी ) की आपूर्ति कम से कम हो । 

        चूंकि वसा शरीर के लिए ऊर्जा का स्रोत है , इसलिए बाहर से कम वसा और कम कैलोरी पहुँचेगी तो शरीर में ऊर्जा की आवश्यकता पूरी करने के लिए अन्दर जमा चर्बी अपघटित होकर शरीर के काम आने लगेगी और इस तरह मोटापा कम होना शुरू हो जाएगा ।

         कैलोरी कम करने के चक्कर में अक्सर लोग भोजन एकदम कम कर देते हैं । आजकल प्रचलित ' डायटिंग ' का यह तरीका काफी नुकसानदेह हो सकता है और इससे आप शक्तिहीनता और कई दूसरी बीमारियों के शिकार हो सकते हैं । 

        दरअसल आहार को कम करने के बजाय उसे संतुलित करने की ज़रूरत है । भोजन में ऐसी चीजें शामिल करनी चाहिए जो कम वसायुक्त हों और जिन का ऊर्जामान ( कैलोरी ) कम हो , परंतु वे शरीर के लिए ज़रूरी पोषकता की पूर्ति करने वाली हों । आहार संतुलन के बाद विहार में भी संतुलन ज़रूरी है । अर्थात् पूरे दिन में से कुछ समय आपको शारीरिक श्रम के लिए अवश्य ही निकालना चाहिए । 

        जितनी ऊर्जा शरीर को भोजन से मिलती है अगर उससे ज़्यादा श्रम में खर्च होत है तो समझिए कि मोटे लोगों के लिए सार्थक परिणाम निकल सकते हैं । 


आहार - विहार को संतुलित करते हुए मोटापा घटाने का फिलहाल एक कार्यक्रम दिया जा रहा है, मोटे लोग इसे अपनाएं और लाभ उठाएं


  1. 6-7 घण्टे की नींद लेने के बाद सबेरे जल्दी उठने की आदत बनाएं । 
  2. उठने के बाद सबसे पहले 1 गिलास गुनगुने गरम पानी में 2 चम्मच नींबू का रस और दो चम्मच शुद्ध शहद मिलाकर गटागट पी जाएं ।
  3. अब कुछ देर टहलने के बाद शौच के लिए जाएं । 
  4. शौचादि से निवृत्त होकर कम से कम 3-4 किलोमीटर तेज़ कदमों से टहलने निकलें , हो सके तो थोड़ी दौड़ भी लगाएं । 
  5. याद रखें धीरे - धीरे चहल कदमी करने से मोटापे पर कोई असर नहीं पड़ने वाला । 
  6. टहलने के बाद समय हो तो कुछ योगासन व्यायाम करें । टहलने के बजाय चाहें तो केवल आसन व्यायाम से भी काम चला सकते हैं । 
  7. आसनों में सूर्यनमस्कार , उत्तान पादासन , हलासन , धनुरासन , जानुशिरासन , वक्रासन , ताड़ासन , पश्चिमोत्तान आसन , भुजंगासन , पवनमुक्तासन में से पहले आसान आसनों से शुरूआत करके धीरे - धीरे जितने आसन कर सकें , करें । 
  8. उड्डियान बंध तथा भस्त्रिका प्राणायाम भी करें । आसन - व्यायाम फुरसत हो तो सबेरे शाम दोनों समय खाली पेट कर सकते हैं ; और बेहतर परिणाम मिलेगा ।
  9. इतना अवश्य समझ लें कि आसन - व्यायाम योग्य व्यक्ति से सीख - समझकर ही शुरू करना चाहिए ।
  10. नाश्ता हल्का - फुल्का करें । कोई एक किस्म का एक पाव फल या फल का रस लें । 50 ग्राम मूंग में थोड़ा गेहूँ , थोड़ी मेथी मिलाकर अंकुरित करके सेंधा नमक और नींबू का रस मिलाकर भी नाश्ते के रूप में सेवन कर सकते हैं। 
  11. दूध पीते हों तो मलाई उतारकर एक पाव दूध में आधा चम्मच सोंठ तथा 6-7 मुनक्का या थोड़ा अंजीर डालकर उबालें और गुनगुनारहने पर पिएं। 
  12. चाय पीने का इरादा हो तो अदरक या सोंठ , तुलसी , काली मिर्च , लौंग , इलायची , मुलहठी आदि जड़ी - बूटियों की चाय इस्तेमाल कर सकते हैं । 
  13. इस तरह की आयुर्वेदिक चाय गुरुकुल कांगड़ी , दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट ( स्वामी रामदेव ) , गायत्री परिवार , संत आसाराम बापू आश्रम आदि की बनी हुई मिलती है । 
  14. मोटापे से ग्रस्त लोगों को दोपहर और शाम के भोजन में विशेष सावधनी बरतने की जरूरत है । तेल , घी से बनी वसायुक्त और ज़्यादा प्रोटीन व कार्बोज युक्त चीजों का सेवन हर हाल में सीमित कर देना चाहिए । 
  15. भोजन से पहले पर्याप्त मात्रा में सलाद खाएं । हरी सब्जियों की मात्रा भरपूर रखें और गेहूँ की रोटी कम खाएं । 
  16. अगर मोटापे की समस्या ज्यादा हो तो कम से कम एक माह के लिए गेहूँ की रोटी खाना एकदम बंद कर दें । इस दौरान जौ के आटे से बनी रोटी भोजन में लेंया साबुत चने में जौ मिलाकर पिसवा लें । इस आटे की रोटी स्वादिष्ट भी लगेगी । 
  17. 10 किलो चना हो तोदो किलो जौ मिलाएं तो अच्छा लाभ मिलेगा । दालों में छिलकायुक्त मूंग , मसूर का सेवन बेहतर रहेगा । 
  18. चिकित्सा के शुरू में यदि एकाध हफ्ते तक सिर्फ मौसमी फल , फलों के रस , सलाद और हरी सब्जियों व दाल पर ही निर्वाह करें तो अच्छा है । इसके बाद धीरे - धीरे जौ की रोटी सेवन करना शुरू करें ।
  19. एक डेढ़ माह बाद गेहूँ की रोटी खाना शुरू कर सकते हैं । दोनों समय का भोजन इसी तरह का करें । 
  20. शाम को सोने से दो - तीन घण्टे पूर्व भोजन कर लेना हितकर है । कब्जियत दूर करने के लिए एनिमा ले सकते हैं या सोने से पूर्व एक गिलास गुनगुने पानी के साथ एक चम्मच त्रिफला में दो चम्मच ईसबगोल मिलाकर सेवन करें । 
  21. त्रिफला के स्थान पर आँवले का चूर्ण भी ले सकते हैं । वैसे भी भोजन आदि के साथ ताज़ा या सूखे आँवले का चूर्ण , जो भी मिले , अवश्य सेवन करें । दोपहर के भोजन के साथ मलाई रहित दूध से जमाई दही या छाछ भी ले सकते हैं । इससे मोटापा घटाने में मदद मिलेगी । 
  22. भोजन में यह पूरा सुधार अपनाते हुए इतना याद रखें कि शुरू में एक हफ्ते तक फल - सब्ज़ियों पर निर्वाह करने के बाद अचानक ही ढेर सारी रोटियाँ न खाना शुरू कर दें । एक - दो रोटी से शुरू करके धीरे - धीरे रोटियों की संख्या यथोचित मात्रा तक बढ़ाएं । 
  23. मोटापा , खासतौर से पेट और कमर का , घटाने के लिए एक अच्छा प्रयोग यह है कि दोनों समय भोजन करने के तुरंत बाद आधा गिलास उबला हुआ गर्म पानी चाय की तरह जितना गर्म पी सकें पी जाएं । 
  24. यह प्रयोग डेढ़ - दो माह तक कर सकते हैं । इसे बहुत लंबे समय तक नहीं चलाना चाहिए । यह प्रयोग प्रसव के बाद महिलाओं के पेट बढ़ने की समस्या में विशेष लाभप्रद है । 
  25. गठिया , कब्ज , गैस , यकृत रोग , मासिक धर्म की अनियमितता , आँखों के नीचे के कालेपन आदि में भी गर्म पानी का प्रयोग काफी हितकर है  दोपहर और शाम के भोजन में 8-9 घण्टे का अंतराल हो तो बीच में 3 या 4 बजे तक कोई हल्का पेय या फल लें । 
  26. थोड़े भुने चनों साथ आयुर्वेदिक चाय लेकर भी काम चला सकते हैं । इतने उपायों पर अमल करते हुए आप कुछ दिनों में मोटापे की समस्या पर तो विजय पा ही जाएंगे , आपके पोर - पोर में स्फूर्ति का भी संचार होगा । इन उपायों के साथ चाहें तो बायोकैमीकी कल्केरिया फास ग्या 67 , काली फास  . 31 , काली म्यूर 67 , नेट्रम म्यूर 3 तथा साइलीशिया 127 नामक दवाओं की एक - एक टिकिया मिलाकर एक घुट गरम पानी के साथ दिन में तीन - चार बार जब तक मोटापा न कम हो जाए तब तक सेवन कर सकते हैं ।
  27. याद रखें कि बायोकैमिक दवा की टिकिया निगलने के बजाय जीभ पर रखकर चूसनी होती है । यह उपाय सोने पर सुहागा का काम करेगा । इसके अलावा चरित्रागत विशेषताओं के आधार पर चुनी गई कई होम्योपैथी औषधियाँ भी मोटापा घटाने में अच्छा प्रभाव दिखा सकती हैं ।



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